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मदरसों की रक्षा के लिए इनकलाबी कदम उठाने की जरूरत : मुफ्ती अबुल कासिम

मदरसों की रक्षा के लिए इनकलाबी कदम उठाने की  जरूरत : मुफ्ती अबुल कासिम

सहारनपुर । दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम एवं राब्ता ए मदारिस इस्लामिया अरबिया के अध्यक्ष मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि मदरसे हालात का गहराई से जायजा लेते हुए अपनी हिफाजत और सुधार के लिए इनकलाबी कदम उठाएं। देश में खास विचारधारा के लोगों के सत्तासीन हो जाने और मुसलमानों के खिलाफ लगातार हो रही साजिशों के मद्देनजर मदरिसे इस्लामिया की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
मदरसों की रक्षा के लिए हर सम्भव प्रयास करने का आहवान
राब्ता ए मदारिस इस्लामिया अरबिया के इजलास में मदरसा संचालकों एवं उलेमा के समक्ष अध्यक्षीय भाषण में मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि मदरसों के संचालन और वैचारिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जागरुक रहने की जरूरत है क्योंकि मदरसों का असल वजूद तभी तक कायम है जब तक उनके पास वैचारिक स्वतंत्रता मौजूद है। उन्होंने वर्तमान हालात में मुखालिफ ताकतों से मदरसों की हिफाजल के लिए तैयार रहने और खास तौर पर सभी मदरसों से सरकारी मदद से बचने का आहवान किया। मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने मदरसों की शैक्षिक व्यवस्था के सम्बंध में कहा कि मदरसे के पाठ्यक्रम में जरूरत के ऐतबार से छोटे छोटे बदलाव होते रहे हैं लेकिन उनके खास ढंाचे और रूह को नहीं बदला जा सकता। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ साथ बच्चों की तरबियत करना अहम मसला है क्योंकि मदरसों से निकलने वाले बच्चों में शिक्षा के साथ साथ बेहतरीन व्यवहार होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मदरसों के कयाम का असल मकसद शरीयत के इलमी व दीनी मसलों को उनकी असल शकल में कायम रखना है। और तमाम मदारिस को अपने इस असली उद्देश्य से बिल्कुल पीछे नहीं हटना चाहिए।
मस्जिद रशीद में आयोजित हुए राब्ता ए मदारिस इस्लामिया अरबिया के जलसा ए आम में देश के कोने कोने से पहुंचे हजारों मदरसा संचालकों व नामचीन उलेमा ने शिरकत की। जलसे में राब्ता ए मदारिस के नाजिमे उमूमी (संचालक) मौलाना शौकत अली कासमी ने सैक्रेटरी रिपोर्ट पेश की तथा विभिन्न प्रदेशों में सक्रिय राब्ता ए मदारिस की प्रदेश स्तरीय कार्यों पर रोशनी डाली।
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दारुल उलूम की मस्जिद रशीद में आयोजित हुए जलसे का आगाज कारी अब्दुल रऊफ बुलंदशहरी द्वारा कुरआन करीम की तिलावत कर किया गया। मौलाना शौकत अली कासमी ने रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि राब्ता ए मदारिस इसलामी एक देशव्यापी संगठन है। जिसका मुख्य उद्देश्य मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा को सुदृढ बनाना, मदरसों के संचालन में आने वाली समस्याओं का समाधान व दुश्मन ताकतों के हमलों से मदरसों की रक्षा करना है। दारुल उलूम देवबंद मुख्य उस्ताद मुफ्ती सईद अहमद पालनपुरी ने कहा कि मदारिस इसलामिया अरबिया को ज्यादा से ज्यादा फायदेमंद बनाने के लिए शैक्षिक व्यवस्था की खामियों को दूर करना बेहद जरूरी है। इस्लामिक फिकह एकेडमी के महासचिव मौलाना खालिद सेफुल्लाह रहमानी ने कहा कि शिक्षा के साथ साथ मदरसा छात्रों की तरबियत पर अधिक ध्यान देना चाहिए। क्योंकि मदरसों से निकलने वाले बच्चे ही दूसरों की के सामने इस्लाम को असल रूप में पेश कर सकते हैं। जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने मदरसों के अंदरूनी व आर्थिक व्यवस्था को साफ सुथरा रखने की अहमियत पर जोर दिया।
जलसे में मदरसा संचालकों व उलेमा के सामने आठ बिंदुओं पर आधारित प्रस्ताव पेश किया गया। जिस पर गहन विचार विमर्श के बाद राब्ता ए मदारिस के सदस्यों ने हाथ उठाकर अपनी-अपनी सहमती दर्ज कराई। जलसे की अध्यक्षता मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी व संचालन मौलाना शौकत अली कासमी ने किया। इस दौरान मौलाना अरशद मदनी, कारी उस्मान मंसूरपूरी, मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मौलाना कमरुद्दीन गौरखपुरी, मौलाना नेमतुल्लाह आजमी, मौलाना हबीबुर्रहमान आजमी, मुफ्ती हबीबुर्रहमान खेराबादी, मौलाना महमूद खीरवी, मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना निजामुद्दीन खामोश मुम्बई, मुफ्ती अहमद गुजरात, मौलाना अशफाक सरायमीर, मौलाना मतीनुलहक उसामा कानपुर, मौलाना अब्दुल कवी हैदराबाद सहित हजारों की संख्या में देश के विभिन्न हिससों से आए उलेमा मौजूद रहे।

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