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*****************राहुल के बाद सोनिया का दुर्ग भेदने रायबरेली जाएंगे अमित शाह******************

*****************राहुल के बाद सोनिया का दुर्ग भेदने रायबरेली जाएंगे अमित शाह******************

बीजेपी कांग्रेस को उसके ही दुर्ग में घेरने की रणनीति बनाई है. पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी में घेरने की कवायद की थी, जिसके चलते कांग्रेस को अपना किला बचाने में पसीने छूट गए थे. इस बार बीजेपी ने सोनिया गांधी को रायबरेली में घेरने का प्लान बनाया है. इसी मद्देनजर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 21 अप्रैल को रायबरेली के दौरे पर रहेंगे.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हालही में कहा था कि सपा, बसपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ेगी तो पीएम नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव हार जाएंगे. राहुल पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा था कि राहुल पीएम मोदी की नहीं अमेठी और रायबरेली की चिंता करें.

सोनिया को घेरने की रणनीति

शाह का रायबरेली दौरा 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों से ही जोड़कर देखा जा रहा है. शाह अपने दौरे में कांग्रेस के किले को भेदने का भी प्लान है. कांग्रेस से नाराज चल रहे एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह अपने विधायक भाई राकेश प्रताप सिंह और जिला पंचायत अवधेश प्रताप सिंह के साथ पार्टी को अलविदा कहकर बीजेपी ज्वाइन कर सकते हैं. दिनेश सिंह ने साफ कह दिया है कि अब कांग्रेस में नहीं रहना है.

रायबरेली के बदलते सियासी समीकरण के बीच शाह का जिले का दौरा काफी मायने रखना है. ऐसे में बीजेपी आलाकमान अपने दौरे के जरिए बड़ा संदेश देने के लिए दिनेश सिंह और उनके भाइयों को पार्टी में शामिल करा सकते हैं.

बीजेपी में इन कांग्रेसियों की एंट्री

दिनेश सिंह रायबरेली की सियासत में एक बड़ा चेहरा हैं. वो जहां खुद एमएलसी हैं तो उनके एक भाई हरचंद्रपुर से विधायक और एक भाई जिला पंचायत अध्यक्ष हैं. तीनों ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की है. ऐसे में बीजेपी में शामिल होते हैं तो ये कांग्रेस के लिए अपने गढ़ में बड़ा झटका होगा. जबकि बीजेपी इसके जरिए देश की सियासत में माहौल बनाने की कोशिश करेगी.

अजय अग्रवाल नहीं दे सके थे टक्कर

बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सोनिया गांधी के सामने अजय अग्रवाल को मैदान में उतारा था. मोदी लहर के बावजूद वो सोनिया के सामने कड़ी चुनौती पेश नहीं कर सके. यही वजह थी सोनिया ने करीब 3 लाख से ज्यादा मतों से बीजेपी उम्मीदवार को हराया था. ऐसे में बीजेपी ने 2019 में रायबरेली की घेराबंदी करने की रणनीति बनाई है.

राहुल के खिलाफ स्मृति ईरानी

गौरतलब है कि 2014 के चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस को अमेठी में घेरने की रणनीति के तहत राहुल गांधी के सामने स्मृति ईरानी को मैदान में उतारा था. ईरानी के खिलाफ राहुल को जीतने में पसीने छूट गए. हालत ये हो गई प्रियंका गांधी को अमेठी में डेरा जमाना पड़ा. इसके बाद कहीं जाकर राहुल एक लाख वोट से जीत सके. जबकि इससे पहले वो तीन लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी.

राहुल को जीतने में छूट गए थे पसीन

स्मृति ईरानी भले ही चुनाव हार गई, लेकिन राहुल के सामने लड़ने का पीएम मोदी ने तोहफा दिया और उन्हें मंत्री बनाकर अपनी कैबिनेट में शामिल किया. ईरानी पिछले चार साल से अमेठी में सक्रिय है. वो लगातार अमेठी का दौरा कर रही हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर कांग्रेस आलाकमान को घेरती रहती हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में अमेठी संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली सभी सीटें कांग्रेस हार गई थी. जबकि सपा के साथ गठबंधन करके चुनावी मैदान में थी.

अमेठी के तर्ज पर रायबरेली

अमेठी की तर्ज पर अब बीजेपी रायबरेली में ऐसी ही चुनौती पेश करने की तैयारी में जुट गई है. इसी के तहत बीजेपी आलाकमान रायबरेली का दौरे पर जा रहे हैं. वो रायबरेली के स्थानीय नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लोकसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा करेंगे. उसी फीडबैक पर बीजेपी रायबरेली से सोनिया के खिलाफ मजबूत प्रत्याशी खड़ा कर सकती है.

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